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वो पौधा जिसे उगाने के लिठनहीं होती बीज की जरूरत, अदà¥à¤à¥à¤¤ औषधीय गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के चलते कई रोगों का है रामबाण इलाज
पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ का पौधा उगाने के लिठबीज की जरूरत नहीं पड़ती, इसे सिरà¥à¤« पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से ही उगाया जा सकता है. इस पौधे में कई पà¥à¤°à¤•ार के औषधीय गà¥à¤£ à¤à¥€ पाठजाते हैं जो कई रोगों में लाठपहà¥à¤‚चाते हैं.
बिना बीज के ही उग जाता है पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ का पौधा
à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ कहावत है- जैसा बीज बोओगे, वैसा ही फल मिलेगा. यूं तो ये कहावत इंसान के सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ और वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° के लिठकही जाती है. लेकिन ये कहावत à¤à¤• और बात बताती है कि बिना बीज के कोई à¤à¥€ पौधा या पेड़ नहीं उगाया जा सकता है. किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के पौधे या पेड़ के लिठउसका बीज लगाना ही पड़ता है. हालांकि, कà¥à¤› पौधे à¤à¤¸à¥‡ à¤à¥€ होते हैं जिसके लिठबीज की जरूरत नहीं पड़ती. इसी सिलसिले में आज हम आपको à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ ही पौधे के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे उगाने के लिठबीज की जरूरत नहीं पड़ती. जी हां, जिस पौधे के बारे में हम बात कर रहे हैं वह सिरà¥à¤« पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से ही उगाया जा सकता है. इस पौधे का नाम पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ है. पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ का पौधा उगाने के लिठबीज की जरूरत नहीं पड़ती, इसे सिरà¥à¤« पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से ही उगाया जा सकता है.
मिटà¥à¤Ÿà¥€ में सिरà¥à¤« पतà¥à¤¤à¥€ डालने से ही उग आता है पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ का पौधा
पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ के पौधे को à¤à¤• छोटे गमले में à¤à¥€ लगाया जा सकता है. इसके लिठआपको सिरà¥à¤« उसके पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की जरूरत पड़ती है. पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को मिटà¥à¤Ÿà¥€ में डालने के कà¥à¤› दिनों बाद ही पौधा उग आता है. इतना ही नहीं, मिटà¥à¤Ÿà¥€ में इसके पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की किनारी डालने पर à¤à¥€ यह उग आता है. इस पौधे में फूल à¤à¥€ उगते हैं जो मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¤à¤ƒ बसंत और सरà¥à¤¦à¥€ के मौसम में आते हैं. अपनी इस अनोखी खासियत के अलावा पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ की और à¤à¥€ कई खासियत हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस अदà¥à¤à¥à¤¤ पौधे में कई औषधीय गà¥à¤£ à¤à¥€ पाठजाते हैं, जो कई रोगों में जबरदसà¥à¤¤ लाठपहà¥à¤‚चाते हैं. आइठपतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ के कà¥à¤› अदà¥à¤à¥à¤¤ औषधीय गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में जानते हैं.
इन रोगों में पहà¥à¤‚चाता है जबरदसà¥à¤¤ लाà¤
पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ à¤à¤• सामानà¥à¤¯ तासीर वाला पौधा है, जिसे किसी à¤à¥€ मौसम में खाया जा सकता है. इसका सà¥à¤µà¤¾à¤¦ खटà¥à¤Ÿà¤¾ और नमकीन होता है. पथरी के उपचार में बड़े सà¥à¤¤à¤° पर पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है. पथरी के अलावा यह पौधा मूतà¥à¤° विकार, फोड़े-फà¥à¤¨à¥à¤¸à¥€, योनि संकà¥à¤°à¤®à¤£, सिर दरà¥à¤¦, आंख, घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡, हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° जैसे कई रोगों में जबरदसà¥à¤¤ लाठदेता है. अलग-अलग रोगों में पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ का सेवन काढ़ा, पतà¥à¤¤à¥‡, पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का रस, अरà¥à¤•, लेप आदि पà¥à¤°à¤•ार से किया जा सकता है.
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